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जानिए राज्यसभा चुनाव में क्या है प्रक्रिया, इसमें जनता नहीं करती वोट

जानिए राज्यसभा चुनाव में क्या है प्रक्रिया, इसमें जनता नहीं करती वोट

नई दिल्ली: भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा का चुनाव लोकसभा और विधानसभा के चुनाव से बिल्कुलअलग होता है. इसमें आम जनता वोट नहीं करती है, बल्कि हर राज्य के विधायक अपने यहां से राज्यसभा के सांसद चुनते हैं. आइए जानते हैं राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्र‍िया के बारे में—

भारतीय संसद में दो सदन हैं पहला लोकसभा और दूसरा राज्यसभा. राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन कहा जाता है. बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक राज्यसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है. इनमें से 12 वो सदस्य होते हैं जिन्हें स्वयं भारत के राष्ट्रपति मनोनीत या नामित करते हैं. इसके अलावा बाकी बचे 238 सदस्यों को संघ और राज्य के प्रतिनिधि चुनते हैं.

वर्तमान में क्यों हैं 245 सदस्य
इसके पीछे की खास वजह संविधान की अनुसूची चार मानी जाती है. इस अनुसूची के मुताबिक राज्यसभा के सदस्यों का चयन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की आबादी के आधार पर किये जाने के निर्देश हैं. इस प्रकार जब आबादी के हिसाब से गणना की गई तो राज्यसभा के सदस्यों की कुल संख्या 233 ही पहुंच पाई, बाकी बचे राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य जोड़कर वर्तमान में राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या 245 है.

अलग होती है वोटिंग प्रक्रिया 
भारत के किस राज्य से राज्यसभा में कितने सांसद होंगे इसकी गणना राज्य की जनसंख्या के हिसाब से होती है. राज्यसभा के इन सदस्यों का चुनाव विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं. राज्य सभा के सदस्यों को चुनने का तरीका बाकी आम चुनाव या विधानसभा चुनाव से बिल्कुल जुदा होता है. राज्यसभा में एक उम्मीदवार को चुने जाने के लिए न्यूनतम मान्य वोट की जरूरत होती है. इन वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करती है. इसकी गणना करने का एक अलग ही गण‍ित होता है. जैसे उत्तर प्रदेश को उदाहरण के तौर पर लेकर समझ सकते हैं. यहां विधायकों की कुल संख्या 403 है. 

ऐसे करते हैं वोट की गणना
विधायकों की संख्या को जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है. जैसे इस बार यहां से 10 राज्यसभा सदस्यों का चयन होना है. इसमें 1 जोड़ने से यह संख्या 11 होती है. अब कुल सदस्य 403 हैं तो उसे 11 से विभाजित करने पर 36.66 आता है. इसमें फिर 1 जोड़ने पर यह संख्या 37.66 हो जाती है. यानी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी. इसके अलावा वोट देने वाले प्रत्येक विधायक को यह भी बताना होता है कि उसकी पहली पसंद और दूसरी पसंद का उम्मीदवार कौन है. इससे वोट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाते हैं. यदि उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता का वोट मिल जाता है तो वो वह जीत जाता है नहीं तो इसके लिए चुनाव होता है.


 

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