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पायलट बोले- आलाकमान से नहीं हुई बात, गहलोत के साथ बस 84 MLA

पायलट बोले- आलाकमान से नहीं हुई बात, गहलोत के साथ बस 84 MLA

नई दिल्ली: अशोक गहलोत ने सौ से अधिक विधायकों की परेड मीडिया के सामने करवाई और विक्ट्री साइन दिखाकर बहुमत होने की बात का जैसे ही प्रदर्शन किया, सचित पायलट ने तत्काल यह बयान जारी किया कि गहलोत के पास कांग्रेस के मात्र 84 विधायक हैं, बाकी हमारे साथ हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमने कोई भी समझौते की शर्त नहीं रखी है, और किसी आलाकमान से उनकी बातचीत नहीं चल रही है. 

दरअसल यह कुछ घंटे पहले यह खबर आई थी कि पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट को मैसेज भेजा है कि हमारा आप पर स्नेह है. हम आपका सम्मान करते हैं. हम खुले दिल से आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. प्लीज लौट आएं और बात करें.  उधर राजस्थान के विधायक दल में प्रस्ताव पारित किया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि कोई भी कांग्रेस का पदाधिकारी और कांग्रेस का नेता या विधायक सरकार के खिलाफ षड्यंत्र में पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. कांग्रेस विधायक दल ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी में पूरी आस्था व्यक्त करते हुए अपना नेता सर्वसम्मति से अशोक गहलोत को माना है. कांग्रेस विधायक दल में प्रस्ताव पारित हुआ है कि बीजेपी के षड्यंत्रकारी मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया जाएगा. कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से एकजुट है.

क्या कहता है राजस्थान का नंबर गेम?
राजस्थान में कांग्रेस और साथी दलों के पास पूर्ण बहुमत है और भाजपा काफी दूर है. अगर कुछ विधायक पाला बदलते हैं तो राजस्थान की सरकार पर कोई बड़ा संकट नहीं आता दिख रहा है. राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं इसके अलावा उसे कुछ अन्य निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि भाजपा के पास सिर्फ 72 विधायक हैं. अब अगर सचिन पायलट के दावे के मुताबिक, 30 विधायक पाला बदलते हैं, तो अशोक गहलोत सरकार पर संकट आ सकता है.

किस मुद्दे को लेकर आर-पार की लड़ाई?
दरअसल, अशोक गहलोत और सचिन पायलट में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव से ही आरपार की लड़ाई जारी है. लेकिन मौजूदा वक्त में ये विवाद तब गहराया जब अशोक गहलोत ने बीजेपी पर सरकार गिराने का आरोप लगाया, साथ ही पार्टी के अंदर कुछ गद्दारों को चेताया. इसकी जांच के लिए एक ग्रुप बनाया गया, जिसने सचिन पायलट को पूछताछ के लिए नोटिस भेज दिया. हालांकि, ऐसा नोटिस सीएम को भी गया था. इसी के बाद विवाद बढ़ता गया. साथ ही सचिन पायलट के प्रदेश अध्यक्ष पद का कार्यकाल खत्म हो रहा है और राजस्थान में उपचुनाव, पंचायत चुनाव भी होने हैं.

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